राहुल रंजन –
लोक आस्था का महापर्व छठ के तीसरे दिन छठ व्रतियों ने अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया। सूर्यपीठ बड़गांव, औंगारी धाम, बाबा मणिराम अखाड़ा मोरा तालाब छठ घाट, सोहसराय छठ घाट समेत विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। घाटों पर श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान और पवित्रता के साथ पूजा-अर्चना की और छठी मईया के गीतों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
बड़गांव सूर्य मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता :
सूर्यपीठ बड़गांव का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत प्राचीन माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र राजा शाम्य (शाम्ब) कुष्ठ रोग से पीड़ित थे। उन्होंने इस स्थान पर आकर भगवान सूर्य की कठोर तपस्या और आराधना की थी। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उन्हें रोगमुक्त कर दिया। तभी से यह स्थान सूर्य उपासना का प्रमुख केंद्र बन गया। आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है कि बड़गांव के इस पवित्र छठ घाट तालाब में स्नान और पूजा-अर्चना करने से विभिन्न रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। स्थानीय पुरोहित कमलेश पांडेय ने बताया कि छठ महापर्व में अस्ताचलगामी और उदीयमान दोनों सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है, जो जीवन में संतुलन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
घाटों पर भीड़, प्रशासन मुश्तैद :
विभिन्न छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा, साफ-सफाई और रोशनी की समुचित व्यवस्था की गई थी। घाटों पर बैरिकेडिंग, चिकित्सा सुविधा और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई, जिससे व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई ।

