राहुल रंजन की रिपोर्ट-
बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कमजोर वर्ग अपराध अनुसंधान विभाग की पहल पर जिले के सभी थानों में ‘चाइल्ड हेल्प डेस्क’ की शुरुआत की गई है। ‘बच्चों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता’ के तर्ज पर शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक थाने में बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी तैनात किए गए हैं। इन पदाधिकारियों की जिम्मेदारी बच्चों से जुड़े मामलों को संवेदनशीलता के साथ सुनना और जरूरत के अनुसार उन्हें संरक्षण व सहायता उपलब्ध कराना होगा।
ट्रैफिक डीएसपी सह विशेष अपराध मोहम्मद खुर्शीद आलम ने बताया कि नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी अपराध, हिंसा, शोषण, बाल विवाह, बाल मजदूरी, गुमशुदगी या किसी अन्य परेशानी का सामना कर रहे बच्चे को थाने में अपनी बात रखने में किसी तरह की झिझक या भय न हो। आमतौर पर बच्चे पुलिस और थाने के माहौल से असहज महसूस करते हैं। ऐसे में बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी बच्चों के लिए पुलिस और बच्चे के बीच संवेदनशील संपर्क की कड़ी के रूप में काम करेंगे।
बच्चों की समस्या पर त्वरित कार्रवाई पर जोर
पुलिस प्रशासन की इस पहल का मकसद केवल बच्चों से जुड़ी शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं की पहचान कर समय पर हस्तक्षेप और उचित संरक्षण सुनिश्चित करना है। किसी बच्चे के साथ अपराध होने की स्थिति में उसकी सुरक्षा, परामर्श, परिवार से संपर्क और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बाल संरक्षण संस्थाओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया में भी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।इसके अलावा थानों में आने वाले बच्चों के साथ पुलिस का व्यवहार कैसा हो, उनकी पहचान और गरिमा कैसे सुरक्षित रखी जाए तथा उनके मामलों को सामान्य आपराधिक मामलों से अलगसंवेदनशीलता के साथ कैसे देखा जाए, इस दिशा में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सिर्फ कार्रवाई नहीं, रोकथाम भी उद्देश्य
पुलिस प्रशासन का उद्देश्य बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कार्रवाई के साथ-साथ अपराध की रोकथाम और जागरूकता को भी मजबूत करना है। बाल अधिकारों को लेकर बच्चों, अभिभावकों और समाज में जागरूकता बढ़ाना भी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा होगा। इससे बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस, परिवार और बाल संरक्षण तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

