राज की रिपोर्ट
मुहर्रम के दौरान आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की हकीकत उस समय सामने आ गई, जब जिलाधिकारी उदिता सिंह के निर्देश पर अपर समाहर्ता राजीव रंजन कुमार सिन्हा और उप विकास आयुक्त रंजन कुमार चौधरी ने शुक्रवार की रात सदर अस्पताल, बिहारशरीफ का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में अस्पताल की व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां मिलीं। 48 चिकित्सकों में से 21 डॉक्टर अनुपस्थित पाए गए, जबकि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सभी चिकित्सकों और पारा मेडिकल कर्मियों को रेडी मोड में रहने का निर्देश दिया गया था।
सबसे पहले आकस्मिक विभाग का निरीक्षण किया गया, जहां केवल डॉ. संत कुमार, डॉ. महेंद्र कुमार और डॉ. सावन सुमन उपस्थित मिले। ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी पर तैनात डॉ. संजीव कुमार और डॉ. राजीव रंजन अनुपस्थित थे। निरीक्षण दल ने उपस्थिति पंजी की जांच में पाया कि कुल 48 चिकित्सकों में 21 अनुपस्थित हैं। अधिकारियों ने इसे सरकारी आदेश की अवहेलना और कार्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि मुहर्रम के दिन गोली लगने से घायल त्रिभुवन पंडित को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया था, लेकिन सर्जन की अनुपस्थिति के कारण उसे रेफर करना पड़ा। इतना ही नहीं, आकस्मिक विभाग के मरीज पंजी में उसका नाम तक दर्ज नहीं किया गया था। अधिकारियों ने इस पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि प्रत्येक मरीज का नाम अनिवार्य रूप से पंजी में दर्ज किया जाए।
निरीक्षण में चिकित्सकों की ड्यूटी रोस्टर को लेकर भी गंभीर गड़बड़ी सामने आई। रात करीब नौ बजे स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका अस्पताल पहुंचीं और उन्होंने बताया कि उनकी रोस्टर ड्यूटी है, लेकिन प्रबंधन तत्काल संबंधित रोस्टर उपलब्ध नहीं करा सका। बाद में दूसरा रोस्टर प्रस्तुत किया गया। इससे अधिकारियों ने आशंका जताई कि अस्पताल में दो-दो रोस्टर तैयार किए जा रहे हैं। जांच में उपस्थिति पंजी और रोस्टर में भी कोई मेल नहीं मिला।
प्रबंधक ने बताया कि उपाधीक्षक एवं सर्जन डॉ. राजीव रंजन अपने पिता के निधन के कारण अनुपस्थित हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि मुहर्रम जैसे संवेदनशील अवसर पर उनके स्थान पर किसी अन्य सर्जन की व्यवस्था करना आवश्यक था, जो नहीं की गई। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि ऑपरेशन थिएटर में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था।
अस्पताल की साफ-सफाई भी सवालों के घेरे में रही। आकस्मिक विभाग के बेड गंदे मिले, जबकि प्रतिदिन बेडशीट बदलने का प्रावधान है। जनरल वार्ड के मरीजों सुधांशु कुमार, लड्डू कुमार और पूनम देवी ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें भोजन नहीं मिला, जबकि अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
प्रसूति वार्ड में भर्ती पूनम कुमारी ने बताया कि उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन दवा नहीं मिलने के कारण अस्पताल में ही रुकना पड़ा। डिस्चार्ज होने के कारण उन्हें भोजन भी नहीं दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि मुहर्रम के कारण ओपीडी बंद थी, इसलिए दवा नहीं मिल सकी। अधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब ओपीडी बंद थी तो मरीज को डिस्चार्ज क्यों किया गया।
एएनसी वार्ड में एक महिला मरीज ने बताया कि लगातार उल्टी होने के बावजूद उसके लिए कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। इस पर अधिकारियों ने तत्काल आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
एम्बुलेंस व्यवस्था की समीक्षा में भी कई कमियां सामने आईं। प्रबंधक ने बताया कि अस्पताल में सात एम्बुलेंस हैं और सभी चालू स्थिति में हैं, लेकिन एम्बुलेंस संचालन का कोई अलग पंजी संधारित नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल एम्बुलेंस परिचालन पंजी तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि प्रत्येक वाहन की आवाजाही और उपयोग का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।
निरीक्षण के अंत में अधिकारियों ने कहा कि अस्पताल की अव्यवस्था से स्पष्ट है कि सिविल सर्जन और अस्पताल प्रबंधन द्वारा नियमित अनुश्रवण नहीं किया जा रहा है। सिविल सर्जन को प्रतिदिन अस्पताल की निगरानी करने, चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का पारदर्शी रोस्टर तैयार करने, उपस्थिति सुनिश्चित करने, बरसात के मौसम को देखते हुए सर्पदंश की दवाएं उपलब्ध रखने तथा अस्पताल परिसर की साफ-सफाई बेहतर बनाए रखने का निर्देश दिया गया। साथ ही अनुपस्थित चिकित्सकों एवं संबंधित कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

