राहुल रंजन की रिपोर्ट
नूरसराय प्रखंड के मध्य विद्यालय परासी में मंगलवार को मिड डे मील में डिटर्जेंट पाउडर चले जाने से 48 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। चावल-सोयाबीन की सब्जी खाने के तुरंत बाद बच्चों को गले में जलन, उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने लगे। मामला रसोइया की लापरवाही से जुड़ा है।
प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह के अनुसार स्कूल में 132 बच्चे मौजूद थे। खाना रामघाट स्थित एनजीओ से आता है। मेन्यू में चावल-सोयाबीन था। एक छात्रा ने नमक कम होने की शिकायत की। रसोइया ने नमक के डिब्बे की जगह भूलवश सर्फ का डिब्बा उठा लिया और सब्जी में डाल दिया। बच्चों ने वही खाना खा लिया। घटना के बाद स्कूल में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। छात्र प्रियांशु और प्रिंस ने बताया कि सब्जी का स्वाद अलग लगा, फिर उल्टी शुरू हो गई। इसी दौरान स्कूल के चार शिक्षक परिसर से निकल गए। केवल दो महिला शिक्षक अंजुला कुमारी और इफत आरा बच्चों को संभालती रहीं।
सूचना पर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार, बीडीओ डॉ. जियाउल हक और सीओ दीपक कुमार मौके पर पहुंचे। बच्चों को ले जाने के लिए 112, थाना वाहन, बीडीओ-सीओ की गाड़ियों के साथ नूरसराय, हरनौत और रहुई से 6 से अधिक एंबुलेंस बुलाई गईं। गंभीर बच्चों को बिहारशरीफ मॉडल अस्पताल भेजा गया। नूरसराय सीएचसी में प्रिंस, प्रियांशु सहित 29 बच्चों का इलाज चल रहा है। मॉडल अस्पताल में राखी, वैष्णवी, शिवानी सहित 18 बच्चों को भर्ती किया गया है। डॉ. देवशंकर नाथ ने बताया कि सभी खतरे से बाहर हैं। स्कूल में भी 30 बच्चों का हेल्थ चेकअप किया गया।
परिजनों ने व्यवस्था पर खड़े किये सवाल :
परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करते हुए हंगामा किया। उनका कहना था कि घटना की सूचना सदर अस्पताल व सिविल सर्जन को दी गयी थी। इसके बाद भी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की गयी। बच्चों को टेम्पो और ई-रिक्शा से अस्पताल लाना पड़ा। अस्पताल में भी सूचना के बाद तैयारी नहीं थी। एक ही बेड पर दो-तीन बच्चों को सुलाकर इलाज किया जा रहा है। सीएस डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बेहतर इलाज का आश्वासन देकर परिजनों को शांत करवाया। उन्होंने बताया कि सभी की हालत ठीक है।
मंत्री श्रवण कुमार मॉडल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन देना सरकार की प्राथमिकता है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। भोजन का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट के बाद कार्रवाई तय होगी।

